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About Satanshu
शिवेश श्रीवास्तव

जिस तरह हरियाली और झीलों के बगैरभोपाल की कल्पना करना सम्भव नहीं है उसी तरह संगीत काभी यहां के लोगों के लिए एक अहम मुकाम है और इसके बगैर यहां के लोग खुद को अधूरा मानते हैं। यह कहना है राजधानी के प्रख्यात गिटारिस्ट सतांशु दुबे का। सतांशु विगत 20 वर्षों से संगीत की सेवा में समर्पित हैं और अपने पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें गाने का बहुत शौक था और फिर परिचय हुआ ख
 
ूबसूरत साज गिटार से। फिर क्या था उन्होंने धीरे-धीरे गिटार सीखना शुरू किया और वरिष्ठ लोगों से ज्ञान मिलता गया। ईश्वर की कृपा से आवाज तो थी ही उसके साथ साज का संगम हो गया तो बात और बन गई। कक्षा 10वीं में पहली बार उन्होंने अपने स्कूल के फंक्शन में परफॉर्म किया था। फिर क्या था उस परफॉर्मेंस से उन्हें जो पहचान मिली उस चीज ने उनका हौसला और ज्यादा बढ़ा दिया और फिर वे गिटर के साथ एकल स्टेज शो करने लगे।
खास-पसंद

एक तरफ जहां युवा पाश्चात्य संगीत की ओर भाग रहे हैं, वहीं सतांशु को लाइट गजल्स और क्लासिकल टच की चीजें गाने बजाने का बेहद शौक है। ऐसी बात नहीं है कि उन्होंने वेस्टर्न से अपना नाता नहीं रखा है, बल्कि वे उसके भी मास्टर हैं और उनकी अपनी बेहतरीन कंपोजिशंस भी मौजूद हैं, जिन्हें वे खास मौके पर यूज करते हैं। सतांशु कहते हैं कि अच्छा परफॉर्म करने के लिए और अच्छा कलाकार बनने के लिए किसी योग्य गुरू का मार्गदर्शन भी आवश्यक है।
 
और वे अपनीगायिकी में निखार लाने के लिए सीखने कोभी अहमियत देते हैं। जब भी मौका मिलता है नई चीज सीखने में उन्हें कोई परहेज नहीं होता। वे कहते हैं इससे अपनी फील्ड और आपका नॉलेज ही गेन होता है।
भोपाल का कोई ऐसा मंच नहीं है, जहां सतांशु ने परफॉर्म न किया हो। शहर के एमवीएम कॉलेज से पासआउट सतांशु भोपाल दूरदर्शन से लेकर विभिन्न निजी टीवी चैनलों पर अपनी शानदार प्रस्तुतियां दे चुके हैं और भोपाल ही नहीं दिल्ली, मुंबई और देश के बड़े शहरों में भी अपनी कला के जौहर दिखा आए हैं व समय-समय पर उनकी प्रस्तुतियां होती ही रहती हैं। वे कहते हैं कि जब वे परफॉर्म करते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद के साथ-साथ, सभी की पसंद का ख्याल रखना होता है और स्टेज परफॉर्मेंस में नए-पुराने फिल्मी गीतों से वे खूब समा बांधते हैं
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने बड़ी झील पर क्रूज का संचालन किया था और वहां भी सतांशु नियमित सैलानियों को बड़ी झील के सफर के दौरान पानी की लहरों की कल-कल के साथ अपनी आवाज और साज के सुर-ताल मिलाते थे और लंबे समय तक वे वहां बतौर म्यूजिशियंसभी जुड़े रहे।?
अंदर की बातसतांशु जब तन्हा होते हैं, या फिर उन्हें उस तरहके श्रोता मिलते हैं, जो उनकी दिल की चीज सुनना चाहते हैं, तो वे गजल गाना अपनी पहली पसंद मानते हैं। उनका कहना है कि यह क्लास वर्ग होता है, जो फीलिंग्स से जुड़ी चीजों को खास अंदाज में सुनना पसंद करता है। जब वे ऐसे रसिकों के साथ मेहफिल में बैठते हैं, तो रात कब गुजर जाती है संगीत के सुरों के साथ पता ही नहींचलतावे प्रख्यात गजल गायक जगजीत सिंह के बड़े फैन हैं और जहां भी उनका शो होता है वे वाउनका सपना संगीत की दुनिया में नाम रौशन करने का है। इसके लिए वे नहीं मानते कि सिर्फ मुंबई में ही जाकर कुछ हो सकता है।
जैसे-तैसे पहुंहच जाते हैं। वे मानते हैं हुनर है, तो कदर है बस मेहनत और प्रयास करते जाइए और मौके की तलाश में हमेशा रहिए। आपकी कला और टेलेंट का चुंबक कद्रदानों को खुद ही खींच लाएगा। इस बीच प्रयास करते रहिए और रियाज तो बेहद जरूरी है। राज्य स्तर पर सतांशु को कई बार उनकी कला के लिए पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इन दिनों वे संगीत की सेवा के साथ-साथ राजधानी के कलाकारों के लिए एक से बढ़कर एक हर तरह के आधुनिक साज उपलब्ध करवाने का काम भी साथ में कर रहे हैं
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